Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.210.28: इस प्रकार पूर्वकाल में अविनाशी भगवान महादेव के चार मुख थे और संहारक इंद्र के हजार नेत्र थे।   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.210.28 
एवं चतुर्मुख: स्थाणुर्महादेवोऽभवत् पुरा।
तथा सहस्रनेत्रश्च बभूव बलसूदन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूर्वकाल में अविनाशी भगवान महादेव के चार मुख थे और संहारक इंद्र के हजार नेत्र थे।
 
Thus in the past, the indestructible Lord Mahadeva had four faces and the killer Indra had a thousand eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)