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mahabharat 1.210.27: इसी प्रकार इन्द्र के आगे, पीछे तथा बगल में लाल कोनों वाली हजारों विशाल आंखें प्रकट हुईं।   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.210.27 
महेन्द्रस्यापि नेत्राणां पृष्ठत: पार्श्वतोऽग्रत:।
रक्तान्तानां विशालानां सहस्रं सर्वतोऽभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार इन्द्र के आगे, पीछे तथा बगल में लाल कोनों वाली हजारों विशाल आंखें प्रकट हुईं।
 
Similarly, thousands of huge eyes with red corners appeared in front, behind and on the sides of Indra. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)