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mahabharat 1.210.24: वहाँ जब तिलोत्तमाँ देवमण्डली की परिक्रमा करने लगीं, तब इन्द्र और भगवान शंकर दोनों ही धैर्यपूर्वक अपने स्थान पर बैठे रहे॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.210.24 
कुर्वत्या तु तदा तत्र मण्डलं तत् प्रदक्षिणम्।
इन्द्र: स्थाणुश्च भगवान् धैर्येण प्रत्यवस्थितौ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जब तिलोत्तमाँ देवमण्डली की परिक्रमा करने लगीं, तब इन्द्र और भगवान शंकर दोनों ही धैर्यपूर्वक अपने स्थान पर बैठे रहे॥24॥
 
There, when Tilottman started circumambulating the Devmandali, both Indra and Lord Shankar remained patiently sitting at their places. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)