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mahabharat 1.210.20: ब्रह्माजी बोले - भद्रे तिलोत्तमे! तुम सुन्द और उपसुन्द नामक दैत्यों के पास जाओ और अपने अत्यंत मनोहर रूप से उन्हें रिझाओ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.210.20 
पितामह उवाच
गच्छ सुन्दोपसुन्दाभ्यामसुराभ्यां तिलोत्तमे।
प्रार्थनीयेन रूपेण कुरु भद्रे प्रलोभनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - भद्रे तिलोत्तमे! तुम सुन्द और उपसुन्द नामक दैत्यों के पास जाओ और अपने अत्यंत मनोहर रूप से उन्हें रिझाओ॥20॥
 
Brahmaji said – Bhadre Tilottame! You go to the demons named Sunda and Upasunda and woo them with your very charming form. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)