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mahabharat 1.210.16: उसके शरीर पर एक कण भी ऐसा स्थान नहीं था, जहां उसकी सुन्दरता को निहारने वाले दर्शकों की निगाहें न रुकतीं। 16.   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.210.16 
न तस्या: सूक्ष्ममप्यस्ति यद् गात्रे रूपसम्पदा।
नियुक्ता यत्र वा दृष्टिर्न सज्जति निरीक्षताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उसके शरीर पर एक कण भी ऐसा स्थान नहीं था, जहां उसकी सुन्दरता को निहारने वाले दर्शकों की निगाहें न रुकतीं। 16.
 
There was not even an iota of space on her body where the gaze of the onlookers intent on admiring her beauty would not stop. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)