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mahabharat 1.210.12: ब्रह्माजी की आज्ञा स्वीकार करके विश्वकर्मा ने उन्हें प्रणाम किया और बहुत विचार-विमर्श के बाद एक दिव्य युवती की रचना की॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.210.12 
पितामहं नमस्कृत्य तद्वाक्यमभिनन्द्य च।
निर्ममे योषितं दिव्यां चिन्तयित्वा पुन: पुन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी की आज्ञा स्वीकार करके विश्वकर्मा ने उन्हें प्रणाम किया और बहुत विचार-विमर्श के बाद एक दिव्य युवती की रचना की॥12॥
 
Accepting Brahma's command, Vishwakarma bowed to him and after much deliberation created a celestial young woman.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)