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mahabharat 1.21.9: वह भयानक समुद्र जल-जन्तुओं के शब्द से और भी अधिक भयानक प्रतीत हो रहा था; वह भयंकर गर्जना कर रहा था, उसमें गहरे भँवर उठ रहे थे और उससे समस्त प्राणियों में भय उत्पन्न हो रहा था॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.21.9 
घोरं जलचरारावरौद्रं भैरवनि:स्वनम्।
गम्भीरावर्तकलिलं सर्वभूतभयंकरम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह भयानक समुद्र जल-जन्तुओं के शब्द से और भी अधिक भयानक प्रतीत हो रहा था; वह भयंकर गर्जना कर रहा था, उसमें गहरे भँवर उठ रहे थे और उससे समस्त प्राणियों में भय उत्पन्न हो रहा था॥9॥
 
That terrible ocean appeared even more terrifying due to the sounds of the sea animals; it was roaring terribly, deep whirlpools were rising in it and it created fear in all living creatures.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)