Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.21.7: पाताल लोक की अग्नि, बड़वानल, भी इसमें निवास करती है। दैत्यों के लिए यह समुद्र भाई और शरण के समान है, किन्तु अन्य स्थलीय प्राणियों के लिए यह अत्यन्त भयकर है॥7॥ | mahabharat अध्याय 1.21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पातालज्वलनावासमसुराणां च बान्धवम्।
भयंकरं च सत्त्वानां पयसां निधिमर्णवम्॥ ७॥
अनुवाद
पाताल लोक की अग्नि, बड़वानल, भी इसमें निवास करती है। दैत्यों के लिए यह समुद्र भाई और शरण के समान है, किन्तु अन्य स्थलीय प्राणियों के लिए यह अत्यन्त भयकर है॥7॥
The fire of the netherworld, Badavanala, also resides in it. To the demons, this ocean is like a brother and a refuge, but it is very fearful for other terrestrial creatures. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥