Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.21.18: इस प्रकार गम्भीर, तिमि और मकर आदि भयंकर जल जन्तुओं से युक्त, जलचरों के शब्दों रूपी भयंकर शब्द से निरन्तर गर्जना करने वाला, अत्यन्त विशाल, आकाश के समान स्वच्छ, जल का गम्भीर, अनन्त और महान भण्डार वाला वह समुद्र दुःखी और याचना करता हुआ दिखाई देता था॥18॥ | mahabharat अध्याय 1.21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार गम्भीर, तिमि और मकर आदि भयंकर जल जन्तुओं से युक्त, जलचरों के शब्दों रूपी भयंकर शब्द से निरन्तर गर्जना करने वाला, अत्यन्त विशाल, आकाश के समान स्वच्छ, जल का गम्भीर, अनन्त और महान भण्डार वाला वह समुद्र दुःखी और याचना करता हुआ दिखाई देता था॥18॥
In this way, the sea, which was full of fierce water animals like Gambhir, Timi and Makar, which constantly roared with terrible sounds in the form of words of aquatic creatures, was extremely vast, as clean as the sky, was a deep, infinite and great reservoir of water, seen as sad and pleading. 18॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे एकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरितके प्रसंगमें इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥