Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.21.1-2: उग्रश्रवा कहते हैं - हे तपस्वी! तत्पश्चात जब रात्रि बीत गई, प्रातःकाल हुआ और सूर्यदेव उदय हुए, तब कद्रू और विनता दोनों बहनें बड़े जोश और क्रोध के साथ दासी बनने की शर्त लगाकर उच्चैःश्रवा नामक घोड़े को निकट से देखने गईं॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 1.21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.21.1-2 
सौतिरुवाच
ततो रजन्यां व्युष्टायां प्रभातेऽभ्युदिते रवौ।
कद्रूश्च विनता चैव भगिन्यौ ते तपोधन॥ १॥
अमर्षिते सुसंरब्धे दास्ये कृतपणे तदा।
जग्मतुस्तुरगं द्रष्टुमुच्चै:श्रवसमन्तिकात्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवा कहते हैं - हे तपस्वी! तत्पश्चात जब रात्रि बीत गई, प्रातःकाल हुआ और सूर्यदेव उदय हुए, तब कद्रू और विनता दोनों बहनें बड़े जोश और क्रोध के साथ दासी बनने की शर्त लगाकर उच्चैःश्रवा नामक घोड़े को निकट से देखने गईं॥1-2॥
 
Ugrasrava says - O ascetic! Thereafter when the night passed, the morning came and the Sun God rose, then both the sisters Kadru and Vinata with great zeal and anger, having put their bets on being maids, went to see the horse named Uchchaihshrava closely. ॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)