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mahabharat 1.209.24: वहाँ न तो कृषि थी, न गोरक्षा। नगर और आश्रम उजड़ गए थे। सब ओर अस्थि-पंजर ही अस्थि-पंजर थे। इस प्रकार पृथ्वी को देखना भी भयानक प्रतीत होता था॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.209.24 
निवृत्तकृषिगोरक्षा विध्वस्तनगराश्रमा।
अस्थिकङ्कालसंकीर्णा भूर्बभूवोग्रदर्शना॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ न तो कृषि थी, न गोरक्षा। नगर और आश्रम उजड़ गए थे। सब ओर अस्थि-पंजर ही अस्थि-पंजर थे। इस प्रकार पृथ्वी को देखना भी भयानक प्रतीत होता था॥ 24॥
 
There was no agriculture or cow protection. Cities and ashrams were in ruins. Bones and skeletons were everywhere. In this manner, even looking at the earth seemed terrifying.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)