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mahabharat 1.209.18: सब आश्रम उजड़ गए। घड़े और पात्र तोड़कर फेंक दिए गए। उस समय सारा जगत् ऐसा उजाड़ हो गया मानो काल ने उसे नष्ट कर दिया हो॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.209.18 
मथितैराश्रमैर्भग्नैर्विकीर्णकलशस्रुवै:।
शून्यमासीज्जगत् सर्वं कालेनेव हतं तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सब आश्रम उजड़ गए। घड़े और पात्र तोड़कर फेंक दिए गए। उस समय सारा जगत् ऐसा उजाड़ हो गया मानो काल ने उसे नष्ट कर दिया हो॥18॥
 
All the ashrams were devastated. The pitchers and vessels were broken and thrown away. At that time the whole world became desolate as if it had been destroyed by time.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)