Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.209.17: जैसे गरुड़ के भय से सर्प भाग जाते हैं, उसी प्रकार पृथ्वी के जितेन्द्रिय, शांतिप्रिय और तपस्वी महात्मा भी उन दोनों राक्षसों के भय से भाग गए॥17॥ | mahabharat अध्याय 1.209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथिव्यां ये तप:सिद्धा दान्ता: शमपरायणा:।
तयोर्भयाद् दुद्रुवुस्ते वैनतेयादिवोरगा:॥ १७॥
अनुवाद
जैसे गरुड़ के भय से सर्प भाग जाते हैं, उसी प्रकार पृथ्वी के जितेन्द्रिय, शांतिप्रिय और तपस्वी महात्मा भी उन दोनों राक्षसों के भय से भाग गए॥17॥
Just as snakes run away in fear of Garuda, in the same way the Jitendriya, peace-loving and ascetic Mahatmas of the earth also ran away in fear of those two demons. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥