Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.209.15: कुछ तपस्वी ऋषियों ने क्रोध में आकर उन्हें शाप दे दिया, परन्तु उनके शाप भी उनका कुछ बिगाड़ न सके, क्योंकि वे दैत्यों के वरदानों के कारण नष्ट हो गए ॥15॥ | mahabharat अध्याय 1.209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपोधनैश्च ये क्रुद्धै: शापा उक्ता महात्मभि:।
नाक्रामन्त तयोस्तेऽपि वरदाननिराकृता:॥ १५॥
अनुवाद
कुछ तपस्वी ऋषियों ने क्रोध में आकर उन्हें शाप दे दिया, परन्तु उनके शाप भी उनका कुछ बिगाड़ न सके, क्योंकि वे दैत्यों के वरदानों के कारण नष्ट हो गए ॥15॥
Some sages who were full of penance cursed them in anger but their curses too were not able to harm them as they were countered by the boons given by the demons. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥