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mahabharat 1.209.10: 'इस पृथ्वी पर बहुत से राजा और ब्राह्मण रहते हैं, जो महान यज्ञ करते हैं और हवन करके देवताओं का तेज, बल और धन बढ़ाते हैं।'॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 209: सुन्द और उपसुन्दद्वारा क्रूरतापूर्ण कर्मोंसे त्रिलोकीपर विजय प्राप्त करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.209.10 
राजर्षयो महायज्ञैर्हव्यकव्यैर्द्विजातय:।
तेजो बलं च देवानां वर्धयन्ति श्रियं तथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'इस पृथ्वी पर बहुत से राजा और ब्राह्मण रहते हैं, जो महान यज्ञ करते हैं और हवन करके देवताओं का तेज, बल और धन बढ़ाते हैं।'॥10॥
 
'On this earth live many kings and Brahmins who perform great yagyas and increase the glory, power and wealth of the gods by offering oblations.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)