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mahabharat 1.208.7: किसी समय तीनों लोकों पर विजय पाने की इच्छा से वे गुरु से दीक्षा लेने को तैयार हो गए और विन्ध्य पर्वत पर आकर वहाँ कठोर तप करने लगे॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.208.7 
त्रैलोक्यविजयार्थाय समाधायैकनिश्चयम्।
दीक्षां कृत्वा गतौ विन्ध्यं तावुग्रं तेपतुस्तप:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
किसी समय तीनों लोकों पर विजय पाने की इच्छा से वे गुरु से दीक्षा लेने को तैयार हो गए और विन्ध्य पर्वत पर आकर वहाँ कठोर तप करने लगे॥7॥
 
At some time, with the desire to conquer all three worlds, they agreed to take initiation from the Guru and came to Vindhya Mountain and started performing rigorous penance there. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)