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mahabharat 1.208.32: यहाँ-वहाँ जोर-जोर से तालियों की ध्वनि से राक्षसों का सारा नगर हर्ष और प्रसन्नता में डूबा हुआ प्रतीत हो रहा था ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.208.32 
तत्र तत्र महानादैरुत्कृष्टतलनादितै:।
हृष्टं प्रमुदितं सर्वं दैत्यानामभवत् पुरम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यहाँ-वहाँ जोर-जोर से तालियों की ध्वनि से राक्षसों का सारा नगर हर्ष और प्रसन्नता में डूबा हुआ प्रतीत हो रहा था ॥32॥
 
The entire city of demons seemed immersed in joy and happiness with the sound of loud clapping here and there. ॥32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)