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mahabharat 1.208.31: हर घर में 'खाओ, आनंद लो, बांटो, आनंद मनाओ, गाओ और पियो' ये शब्द हमेशा गूंजते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.208.31 
भक्ष्यतां भुज्यतां नित्यं दीयतां रम्यतामिति।
गीयतां पीयतां चेति शब्दश्चासीद् गृहे गृहे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हर घर में 'खाओ, आनंद लो, बांटो, आनंद मनाओ, गाओ और पियो' ये शब्द हमेशा गूंजते रहते थे।
 
In every home the words 'Eat, enjoy, give away, be merry, sing and drink' were always resounding. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)