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mahabharat 1.208.27: तत्पश्चात् वे दोनों भाई, दैत्यराज सुन्द और उपसुन्द, अभीष्ट वर पाकर समस्त लोकों में अजेय हो गए और अपने घर लौट गए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.208.27 
लब्ध्वा वराणि दैत्येन्द्रावथ तौ भ्रातरावुभौ।
अवध्यौ सर्वलोकस्य स्वमेव भवनं गतौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे दोनों भाई, दैत्यराज सुन्द और उपसुन्द, अभीष्ट वर पाकर समस्त लोकों में अजेय हो गए और अपने घर लौट गए॥ 27॥
 
Thereafter both the brothers, the demon kings Sunda and Upasunda, having received the desired boon, became invincible for all the worlds and returned to their home.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)