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mahabharat 1.208.26: नारदजी कहते हैं - युधिष्ठिर! उन दोनों दैत्यों को यह वरदान देकर तथा उनकी तपस्या से निवृत्त कराकर ब्रह्माजी ब्रह्मलोक को चले गये।   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.208.26 
नारद उवाच
तत: पितामहो दत्त्वा वरमेतत् तदा तयो:।
निवर्त्त्य तपसस्तौ च ब्रह्मलोकं जगाम ह॥ २६॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं - युधिष्ठिर! उन दोनों दैत्यों को यह वरदान देकर तथा उनकी तपस्या से निवृत्त कराकर ब्रह्माजी ब्रह्मलोक को चले गये।
 
Narada says - Yudhishthira! After giving this boon to those two demons and making them retire from their penance, Brahma went to Brahmaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)