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mahabharat 1.208.2: प्राचीन काल में महाबली दैत्य हिरण्यकशिपु के कुल में निकुम्भ नाम का एक विख्यात दैत्यराज हुआ, जो बड़ा तेजस्वी और बलवान था। 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.208.2 
महासुरस्यान्ववाये हिरण्यकशिपो: पुरा।
निकुम्भो नाम दैत्येन्द्रस्तेजस्वी बलवानभूत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में महाबली दैत्य हिरण्यकशिपु के कुल में निकुम्भ नाम का एक विख्यात दैत्यराज हुआ, जो बड़ा तेजस्वी और बलवान था। 2॥
 
In ancient times, in the clan of the great demon Hiranyakashipu, there was a famous demon king named Nikumbh, who was very bright and strong. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)