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mahabharat 1.208.17: तब सम्पूर्ण जगत् के हितैषी भगवान ब्रह्माजी उन दोनों महादैत्यों के पास आये और उनसे अपनी इच्छानुसार वर मांगने को कहा॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.208.17 
तत: पितामह: साक्षादभिगम्य महासुरौ।
वरेणच्छन्दयामास सर्वलोकहित: प्रभु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब सम्पूर्ण जगत् के हितैषी भगवान ब्रह्माजी उन दोनों महादैत्यों के पास आये और उनसे अपनी इच्छानुसार वर मांगने को कहा॥17॥
 
Then Lord Brahma, the well-wisher of the entire world, came near those two great demons and asked them to ask for the boon as per their wish. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)