Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.208.13-15: तदनन्तर देवताओं ने उन दोनों महाबली दैत्यों पर पुनः माया का प्रयोग किया। उनकी बहनें, माताएँ, पत्नियाँ तथा माया द्वारा उत्पन्न अन्य सम्बन्धी दौड़कर वहाँ आते और कोई राक्षस भाला लेकर उन्हें बार-बार दौड़ाकर भूमि पर पटक देता। उनके आभूषण गिर जाते, वस्त्र खिसक जाते और केश खुल जाते। वे सब सम्बन्धी सुन्द और उपसुन्द को पुकारकर कहते - ‘बेटा! मुझे बचाओ, भैया! मेरी रक्षा करो।’ यह सब सुनकर भी वे दोनों महातपस्वी अपनी तपस्या से विचलित नहीं हुए; वे अपनी प्रतिज्ञा भंग नहीं कर सके॥13-15॥ | mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर देवताओं ने उन दोनों महाबली दैत्यों पर पुनः माया का प्रयोग किया। उनकी बहनें, माताएँ, पत्नियाँ तथा माया द्वारा उत्पन्न अन्य सम्बन्धी दौड़कर वहाँ आते और कोई राक्षस भाला लेकर उन्हें बार-बार दौड़ाकर भूमि पर पटक देता। उनके आभूषण गिर जाते, वस्त्र खिसक जाते और केश खुल जाते। वे सब सम्बन्धी सुन्द और उपसुन्द को पुकारकर कहते - ‘बेटा! मुझे बचाओ, भैया! मेरी रक्षा करो।’ यह सब सुनकर भी वे दोनों महातपस्वी अपनी तपस्या से विचलित नहीं हुए; वे अपनी प्रतिज्ञा भंग नहीं कर सके॥13-15॥
Thereafter, the gods again used illusion on those two demons who were endowed with great self-confidence. Their sisters, mothers, wives and other relatives created by illusion would come running there and some demon holding a spear would chase them again and again and throw them on the ground. Their ornaments would fall, their clothes would slip and locks of hair would come loose. All those relatives would call out to Sunda and Upsunda and scream – ‘Son! Save me, brother! Protect me.’ Even after hearing all this, those two great ascetics did not waver from their penance; they could not break their vow.॥13-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥