Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.208.12: उसने बार-बार रत्नों और सुन्दर स्त्रियों के ढेर भेजकर उन्हें लुभाने की कोशिश की; लेकिन उपवास करने वाले उन महान राक्षसों ने अपनी तपस्या भंग नहीं की। | mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रत्नै: प्रलोभयामासु: स्त्रीभिश्चोभौ पुन: पुन:।
न च तौ चक्रतुर्भङ्गं व्रतस्य सुमहाव्रतौ॥ १२॥
अनुवाद
उसने बार-बार रत्नों और सुन्दर स्त्रियों के ढेर भेजकर उन्हें लुभाने की कोशिश की; लेकिन उपवास करने वाले उन महान राक्षसों ने अपनी तपस्या भंग नहीं की।
He repeatedly tried to entice them by sending heaps of gems and beautiful women; but those great demons who were observing fast did not break their penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥