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mahabharat 1.208.11: उनकी घोर तपस्या देखकर देवतागण बहुत भयभीत हो गए। देवताओं ने उनकी तपस्या में विघ्न डालने के लिए अनेक विघ्न उत्पन्न करने शुरू कर दिए।   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.208.11 
ततो देवा भयं जग्मुरुग्रं दृष्ट्वा तयोस्तप:।
तपोविघातार्थमथो देवा विघ्नानि चक्रिरे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनकी घोर तपस्या देखकर देवतागण बहुत भयभीत हो गए। देवताओं ने उनकी तपस्या में विघ्न डालने के लिए अनेक विघ्न उत्पन्न करने शुरू कर दिए।
 
Seeing his intense penance, the gods became very afraid. The gods started creating many obstacles to disrupt his penance. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)