Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.207.d12-d17: वे मानव धर्म तथा संहिता शास्त्र में सबके लिए विद्यमान धर्म के विशेषज्ञ हैं। वे गाथाओं और साममंत्रों में वर्णित संयोग धर्मों के भी विशेषज्ञ हैं तथा अत्यंत मधुर साम गान के विद्वान हैं। नारदजी स्वयं उन सभी के कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहते हैं जो मोक्ष की इच्छा रखते हैं। उन्हें इस बात का पूर्ण ज्ञान है कि किसका कर्तव्य कब और क्या है। वे ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं तथा नाना प्रकार के धर्मों में अपने मन को लगाए रखते हैं। उन्हें जानने योग्य सभी अर्थों का ज्ञान है। वे सबके प्रति समभाव रखते हैं तथा वेद-संबंधी सभी शंकाओं का निवारण करने वाले हैं। अर्थ समझाते समय वे सदैव शंकाओं का निवारण करते हैं। उनके हृदय में लेशमात्र भी संदेह नहीं रहता। वे स्वभावतः ही धर्म के विशेषज्ञ हैं तथा नाना धर्मों के ज्ञाता हैं। वे लोप से प्रयुक्त एक ही शब्द के अनेक अर्थ, आगमधर्म तथा वृत्तिसंकल्पना, अलग-अलग सुने जाने वाले अनेक शब्दों का एक अर्थ तथा भिन्न-भिन्न शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थों को पूर्णतः देख और समझ लेते हैं। | mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे मानव धर्म तथा संहिता शास्त्र में सबके लिए विद्यमान धर्म के विशेषज्ञ हैं। वे गाथाओं और साममंत्रों में वर्णित संयोग धर्मों के भी विशेषज्ञ हैं तथा अत्यंत मधुर साम गान के विद्वान हैं। नारदजी स्वयं उन सभी के कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहते हैं जो मोक्ष की इच्छा रखते हैं। उन्हें इस बात का पूर्ण ज्ञान है कि किसका कर्तव्य कब और क्या है। वे ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं तथा नाना प्रकार के धर्मों में अपने मन को लगाए रखते हैं। उन्हें जानने योग्य सभी अर्थों का ज्ञान है। वे सबके प्रति समभाव रखते हैं तथा वेद-संबंधी सभी शंकाओं का निवारण करने वाले हैं। अर्थ समझाते समय वे सदैव शंकाओं का निवारण करते हैं। उनके हृदय में लेशमात्र भी संदेह नहीं रहता। वे स्वभावतः ही धर्म के विशेषज्ञ हैं तथा नाना धर्मों के ज्ञाता हैं। वे लोप से प्रयुक्त एक ही शब्द के अनेक अर्थ, आगमधर्म तथा वृत्तिसंकल्पना, अलग-अलग सुने जाने वाले अनेक शब्दों का एक अर्थ तथा भिन्न-भिन्न शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थों को पूर्णतः देख और समझ लेते हैं।
He is an expert in the human religion and the religion of the order which is present for everyone in the Samhita Shastra. He is also an expert in the incidental religions mentioned in the Gathas and Sammantras and is a scholar of very sweet Sama Gaana. Naradji himself strives for the welfare of all those who desire salvation. He has full knowledge of what is the duty of whom and when. He is the best among the wise and keeps his mind engaged in various types of religion. He has knowledge of all the meanings that are worth knowing. He has an equal attitude towards everyone and is the one who removes all doubts related to the Vedas. He always removes doubts while explaining the meaning. There is not even a trace of doubt in his heart. He is naturally an expert in religion and is an expert in various religions. They completely see and understand the multiple meanings of a single word used through omission, Aagamdharma and Vrittisanmana, the one meaning of many words heard separately and the different meanings of different words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥