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mahabharat 1.207.7: वे सब शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर चुके थे और बड़े बुद्धिमान थे। सबने सत्य धर्म की शरण ली थी। इस प्रकार पाण्डव वहाँ बड़े सुख से रहने लगे॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.207.7 
जितारयो महाप्रज्ञा: सत्यधर्मपरायणा:।
मुदं परमिकां प्राप्तास्तत्रोषु: पाण्डुनन्दना:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे सब शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर चुके थे और बड़े बुद्धिमान थे। सबने सत्य धर्म की शरण ली थी। इस प्रकार पाण्डव वहाँ बड़े सुख से रहने लगे॥7॥
 
They had conquered all their enemies and were all very intelligent. All had taken refuge in the true Dharma. Thus the Pandavas lived there very happily. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)