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mahabharat 1.207.6: उस राज्य को पाकर सत्यवादी और पूर्ण श्रद्धावान पराक्रमी राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों के साथ धर्मपूर्वक पृथ्वी पर शासन करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.207.6 
प्राप्य राज्यं महातेजा: सत्यसंधो युधिष्ठिर:।
पालयामास धर्मेण पृथिवीं भ्रातृभि: सह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस राज्य को पाकर सत्यवादी और पूर्ण श्रद्धावान पराक्रमी राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों के साथ धर्मपूर्वक पृथ्वी पर शासन करने लगे।
 
After getting that kingdom the mighty king Yudhishthira, who was truthful and had full faith, started ruling the earth righteously along with his brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)