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mahabharat 1.207.5: वैशम्पायनजी ने कहा-राजन्! धृतराष्ट्र की आज्ञा से राज्य प्राप्त करने के बाद परंतप पांडव द्रौपदी के साथ खांडव-प्रस्थ में भ्रमण करने लगे। 5॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.207.5 
वैशम्पायन उवाच
धृतराष्ट्राभ्यनुज्ञाता: कृष्णया सह पाण्डवा:।
रेमिरे खाण्डवप्रस्थे प्राप्तराज्या: परंतपा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी ने कहा-राजन्! धृतराष्ट्र की आज्ञा से राज्य प्राप्त करने के बाद परंतप पांडव द्रौपदी के साथ खांडव-प्रस्थ में भ्रमण करने लगे। 5॥
 
Vaishampayanji said – King! After getting the kingdom by the order of Dhritarashtra, Parantap Pandavas started traveling with Draupadi in Khandava-Prastha. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)