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mahabharat 1.207.4: हे तपस्वी! मैं पाण्डवों और द्रौपदी के सम्बन्धों के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.207.4 
श्रोतुमिच्छाम्यहं सर्वं विस्तरेण तपोधन।
तेषां चेष्टितमन्योन्यं युक्तानां कृष्णया सह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वी! मैं पाण्डवों और द्रौपदी के सम्बन्धों के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ।॥4॥
 
O ascetic! I wish to hear in detail about the relations between the Pandavas and Draupadi. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)