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mahabharat 1.207.3: जब वे परम भाग्यशाली राजा उसी कृष्ण के प्रति समर्पित थे, तब उनमें आपस में कोई फूट कैसे नहीं पड़ी?॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.207.3 
कथं च पञ्च कृष्णायामेकस्यां ते नराधिपा:।
वर्तमाना महाभागा नाभिद्यन्त परस्परम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब वे परम भाग्यशाली राजा उसी कृष्ण के प्रति समर्पित थे, तब उनमें आपस में कोई फूट कैसे नहीं पड़ी?॥3॥
 
When those highly fortunate kings were devoted to the same Krishna, how did they not have any divisions amongst themselves? ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)