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mahabharat 1.207.24: तपधान! यह सम्पूर्ण घटना किस प्रकार घटित हुई, यह हम विस्तारपूर्वक सुनना चाहते हैं। ब्रह्मन्! हम इसे सुनने के लिए बहुत उत्सुक हैं॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.207.24 
एतत् सर्वं यथावृत्तं विस्तरेण तपोधन।
श्रोतुमिच्छामहे ब्रह्मन् परं कौतूहलं हि न:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तपधान! यह सम्पूर्ण घटना किस प्रकार घटित हुई, यह हम विस्तारपूर्वक सुनना चाहते हैं। ब्रह्मन्! हम इसे सुनने के लिए बहुत उत्सुक हैं॥ 24॥
 
Tapadhan! We wish to hear in detail how this entire episode took place. Brahman! We are very eager to hear it.॥ 24॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि युधिष्ठिरनारदसंवादे सप्ताधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमनराज्यलम्भपर्वमें युधिष्ठिर-नारद-संवादविषयक

दो सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०७॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके २५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४९ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)