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mahabharat 1.207.23: क्या यह तिलोत्तमा कोई अप्सरा थी? किसी देवता की पुत्री थी? और किसके वश में थी, जिसके मोह में वे पागल होकर एक-दूसरे को मार डालने लगे॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.207.23 
अप्सरा देवकन्या वा कस्य चैषा तिलोत्तमा।
यस्या: कामेन सम्मत्तौ जघ्नतुस्तौ परस्परम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
क्या यह तिलोत्तमा कोई अप्सरा थी? किसी देवता की पुत्री थी? और किसके वश में थी, जिसके मोह में वे पागल होकर एक-दूसरे को मार डालने लगे॥23॥
 
Was this Tilottama an Apsara? The daughter of some god? And in whose control was she, in whose desire they went mad and killed each other.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)