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mahabharat 1.207.19: प्राचीन काल में सुन्द और उपसुन्द नाम के दो राक्षस भाई थे। वे सदैव एक साथ रहते थे और दूसरों के लिए अजेय थे (वे केवल आपस में लड़कर ही मर सकते थे)। वे तीनों लोकों में बहुत प्रसिद्ध थे।   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.207.19 
सुन्दोपसुन्दौ हि पुरा भ्रातरौ सहितावुभौ।
आस्तामवध्यावन्येषां त्रिषु लोकेषु विश्रुतौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में सुन्द और उपसुन्द नाम के दो राक्षस भाई थे। वे सदैव एक साथ रहते थे और दूसरों के लिए अजेय थे (वे केवल आपस में लड़कर ही मर सकते थे)। वे तीनों लोकों में बहुत प्रसिद्ध थे।
 
In the past, there were two demon brothers named Sunda and Upasunda. They always lived together and were invincible for others (they could die only by fighting among themselves). They were very famous in all the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)