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mahabharat 1.207.18: नारदजी बोले, "पाण्डवों! तुम सबकी एक ही पत्नी है, वह है पांचाली, अतः तुम लोगों को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि तुम लोगों में कोई कलह न हो।"   |   mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.207.18 
नारद उवाच
पाञ्चाली भवतामेका धर्मपत्नी यशस्विनी।
यथा वो नात्र भेद: स्यात् तथा नीतिर्विधीयताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले, "पाण्डवों! तुम सबकी एक ही पत्नी है, वह है पांचाली, अतः तुम लोगों को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि तुम लोगों में कोई कलह न हो।"
 
Narada said, "Pandvas! You all have the same wife, the glorious Panchali; therefore, you should make such a policy that there is no discord amongst you." 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)