Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.207.12-17: फिर आशीर्वाद शब्दों से उनकी कुशलता की कामना करते हुए उन्होंने कहा, "आप भी बैठिए।" नारद की अनुमति पाकर राजा युधिष्ठिर बैठ गए और उन्होंने कृष्ण से कहा कि स्वयं भगवान नारद पधारे हैं। यह सुनकर द्रौपदी भी शुद्ध एवं एकाग्र मन से उसी स्थान पर गईं जहाँ नारद पाण्डवों के साथ बैठे थे। धर्म का पालन करने वाली वह स्त्री देवर्षि कृष्ण के चरणों में प्रणाम करती हुई, हाथ जोड़कर तथा शरीर को ढँककर खड़ी हो गई। धर्मात्मा एवं सत्यनिष्ठ मुनि भगवान नारद ने राजकुमारी द्रौपदी को अनेक प्रकार के आशीर्वाद देकर उस धर्मपरायण एवं पतिव्रता स्त्री से कहा, "अब तुम भीतर जाओ।" कृष्ण के चले जाने के बाद देवर्षि युधिष्ठिर तथा समस्त पाण्डवों से एकान्त में बात की। | mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर आशीर्वाद शब्दों से उनकी कुशलता की कामना करते हुए उन्होंने कहा, "आप भी बैठिए।" नारद की अनुमति पाकर राजा युधिष्ठिर बैठ गए और उन्होंने कृष्ण से कहा कि स्वयं भगवान नारद पधारे हैं। यह सुनकर द्रौपदी भी शुद्ध एवं एकाग्र मन से उसी स्थान पर गईं जहाँ नारद पाण्डवों के साथ बैठे थे। धर्म का पालन करने वाली वह स्त्री देवर्षि कृष्ण के चरणों में प्रणाम करती हुई, हाथ जोड़कर तथा शरीर को ढँककर खड़ी हो गई। धर्मात्मा एवं सत्यनिष्ठ मुनि भगवान नारद ने राजकुमारी द्रौपदी को अनेक प्रकार के आशीर्वाद देकर उस धर्मपरायण एवं पतिव्रता स्त्री से कहा, "अब तुम भीतर जाओ।" कृष्ण के चले जाने के बाद देवर्षि युधिष्ठिर तथा समस्त पाण्डवों से एकान्त में बात की।
Then, wishing for their prosperity with words of blessing, he said, "You also sit." On receiving Narada's permission, King Yudhishthira sat down and told Krishna that Lord Narada himself had arrived. On hearing this, Draupadi too, with a pure and concentrated mind, went to the same place where Narada was sitting with the Pandavas. The follower of Dharma, bowing at the feet of Devarshi Krishna, stood with her hands folded and her body covered. The righteous and truthful sage, Lord Narada, after giving various kinds of blessings to Princess Draupadi, said to that virtuous and faithful lady, "Now you go inside." After Krishna left, Lord Devarshi spoke to Yudhishthira and all the Pandavas in private.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥