Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.207.10-11: उन्हें आते देख राजा युधिष्ठिर ने आगे बढ़कर उनका अभिवादन किया और उन्हें बैठने के लिए अपना अत्यंत सुंदर आसन दिया। जब ऋषि उस पर बैठे, तो परम बुद्धिमान युधिष्ठिर ने स्वयं उन्हें विधिपूर्वक अर्घ्य दिया और साथ ही अपना राज्य भी उन्हें समर्पित कर दिया। ऋषि उस समय उनकी पूजा स्वीकार करके अत्यंत प्रसन्न हुए। 10-11. | mahabharat अध्याय 1.207: पाण्डवोंके यहाँ नारदजीका आगमन और उनमें फूट न हो, इसके लिये कुछ नियम बनानेके लिये प्रेरणा करके सुन्द और उपसुन्दकी कथाको प्रस्तावित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्हें आते देख राजा युधिष्ठिर ने आगे बढ़कर उनका अभिवादन किया और उन्हें बैठने के लिए अपना अत्यंत सुंदर आसन दिया। जब ऋषि उस पर बैठे, तो परम बुद्धिमान युधिष्ठिर ने स्वयं उन्हें विधिपूर्वक अर्घ्य दिया और साथ ही अपना राज्य भी उन्हें समर्पित कर दिया। ऋषि उस समय उनकी पूजा स्वीकार करके अत्यंत प्रसन्न हुए। 10-11.
Seeing him coming, King Yudhishthira went forward and greeted him and offered him his most beautiful seat to sit. When the sage sat on it, the very intelligent Yudhishthira himself offered him arghya as per the rituals and along with that he dedicated his kingdom to him. The sage was very happy at that time after accepting his worship. 10-11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥