Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.d89-d91: कुन्ती बोलीं—केशव! लाक्षागृह जाने में मुझे जो दुःख हुआ है, उसे मेरे पूज्य पिता कुन्तीभोज भी नहीं समझ सकते। गोविन्द! आपकी ही सहायता से मैं इस दुःखसागर से पार हो पाई हूँ। प्रभु! आप अनाथों, विशेषकर दीन-दुखियों के रक्षक हैं। आपके दर्शन मात्र से हमारे सारे दुःख दूर हो जाते हैं। हे महापुरुष! इन पाण्डवों का सदैव स्मरण करो। ये आपके शुभ विचारों के कारण ही जीवित हैं। | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्ती बोलीं—केशव! लाक्षागृह जाने में मुझे जो दुःख हुआ है, उसे मेरे पूज्य पिता कुन्तीभोज भी नहीं समझ सकते। गोविन्द! आपकी ही सहायता से मैं इस दुःखसागर से पार हो पाई हूँ। प्रभु! आप अनाथों, विशेषकर दीन-दुखियों के रक्षक हैं। आपके दर्शन मात्र से हमारे सारे दुःख दूर हो जाते हैं। हे महापुरुष! इन पाण्डवों का सदैव स्मरण करो। ये आपके शुभ विचारों के कारण ही जीवित हैं।
Kunti said— Keshav! Even my revered father Kunti Bhoja cannot understand the pain I have suffered in going to Lakhshagriha. Govind! It is only with your help that I have crossed this ocean of sorrow. Prabhu! You are the protector of orphans, especially the poor and the suffering. All our sorrows are removed by your sight. O great man! Always remember these Pandavas. They live only because of your good thoughts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥