Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.d88: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण कुन्तीदेवी के पास गए और उन्हें प्रणाम करके मधुर वाणी में बोले- 'चाची! नमस्कार। अब मैं चलता हूँ (कृपया मुझे अनुमति दीजिए)।' | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण कुन्तीदेवी के पास गए और उन्हें प्रणाम करके मधुर वाणी में बोले- 'चाची! नमस्कार। अब मैं चलता हूँ (कृपया मुझे अनुमति दीजिए)।'
Vaishampayana says- Janamejaya! Saying this, Lord Krishna went to Kuntidevi and bowing to her said in a sweet voice- 'Aunt! Namaskar. Now I will go (please give me your permission).'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥