Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.d8-d16: उस समय राजा द्रुपद ने उन्हें एक हजार सुन्दर हाथी दिये, जिनकी पीठ पर सोने के हौदे बंधे थे और गले में सोने के आभूषण थे। उनकी लगाम भी सोने की थी। वे सभी जम्बूण्ड नामक सोने से अलंकृत थे। उनके मस्तक से मदिरा की धारा बह रही थी। बड़े-बड़े महावत उन्हें हाँक रहे थे। वे सभी हाथी अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थे। राजा ने पाँचों पाण्डवों के लिए चार घोड़ों वाले एक हजार रथ दिये, जो सोने और रत्नों से सुसज्जित थे, अत्यन्त सुन्दर लग रहे थे और अपनी प्रभा चारों ओर फैला रहे थे। इतना ही नहीं, राजा ने उत्तम नस्ल के पचास हजार घोड़े भी दिये, जो स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित थे और सुन्दर पंखों तथा मालाओं से सुशोभित थे। इनके अतिरिक्त उन्होंने सुन्दर आभूषणों से सुसज्जित दस हजार दासियाँ भी दीं। इसके साथ ही, उत्तम धनुष धारण किये हुए एक हजार दास भी पाण्डवों को भेंट किये। उन्होंने अनेक शय्याएँ, आसन और पात्र भी दिये, जो सब सोने के बने थे। उन्होंने अन्य भौतिक वस्तुएँ और गौवंश भी भेंट किये। इन सबकी संख्या अलग-अलग एक करोड़ थी। इस प्रकार, बड़े हर्ष और प्रसन्नता के साथ, पांचाल नरेश द्रुपद ने पांडवों को उपर्युक्त वस्तुएँ भेंट कीं। उन्होंने उन्हें ले जाने के लिए एक सौ पालकियाँ और पाँच सौ कुली दिए। इस प्रकार, पांचाल नरेश ने अपनी पुत्री के लिए ये सभी वस्तुएँ और बहुत सारा धन दहेज में दिया। जनमेजय! धृष्टद्युम्न स्वयं अपनी बहन का हाथ पकड़कर उसे रथ पर बिठा ले गए। उस समय एक साथ हजारों प्रकार के वाद्य बजने लगे। | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय राजा द्रुपद ने उन्हें एक हजार सुन्दर हाथी दिये, जिनकी पीठ पर सोने के हौदे बंधे थे और गले में सोने के आभूषण थे। उनकी लगाम भी सोने की थी। वे सभी जम्बूण्ड नामक सोने से अलंकृत थे। उनके मस्तक से मदिरा की धारा बह रही थी। बड़े-बड़े महावत उन्हें हाँक रहे थे। वे सभी हाथी अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थे। राजा ने पाँचों पाण्डवों के लिए चार घोड़ों वाले एक हजार रथ दिये, जो सोने और रत्नों से सुसज्जित थे, अत्यन्त सुन्दर लग रहे थे और अपनी प्रभा चारों ओर फैला रहे थे। इतना ही नहीं, राजा ने उत्तम नस्ल के पचास हजार घोड़े भी दिये, जो स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित थे और सुन्दर पंखों तथा मालाओं से सुशोभित थे। इनके अतिरिक्त उन्होंने सुन्दर आभूषणों से सुसज्जित दस हजार दासियाँ भी दीं। इसके साथ ही, उत्तम धनुष धारण किये हुए एक हजार दास भी पाण्डवों को भेंट किये। उन्होंने अनेक शय्याएँ, आसन और पात्र भी दिये, जो सब सोने के बने थे। उन्होंने अन्य भौतिक वस्तुएँ और गौवंश भी भेंट किये। इन सबकी संख्या अलग-अलग एक करोड़ थी। इस प्रकार, बड़े हर्ष और प्रसन्नता के साथ, पांचाल नरेश द्रुपद ने पांडवों को उपर्युक्त वस्तुएँ भेंट कीं। उन्होंने उन्हें ले जाने के लिए एक सौ पालकियाँ और पाँच सौ कुली दिए। इस प्रकार, पांचाल नरेश ने अपनी पुत्री के लिए ये सभी वस्तुएँ और बहुत सारा धन दहेज में दिया। जनमेजय! धृष्टद्युम्न स्वयं अपनी बहन का हाथ पकड़कर उसे रथ पर बिठा ले गए। उस समय एक साथ हजारों प्रकार के वाद्य बजने लगे।
At that time, King Drupada gave them a thousand beautiful elephants, on whose backs were tied howdahs of gold and gold ornaments adorned their necks. Their reins were also of gold. All of them were decorated with gold called Jambuṇḍa. A stream of wine was flowing from their foreheads. Great mahouts drove them. All those elephants were fully equipped with weapons. The king gave a thousand chariots drawn by four horses for the five Pandavas, which were decorated with gold and gems and looked very beautiful and were spreading their radiance all around. Not only this, the king also gave fifty thousand horses of good breed, which were decorated with golden ornaments and adorned with beautiful fans and garlands. Apart from these, he also gave ten thousand maids decorated with beautiful ornaments. Along with this, a thousand slaves carrying excellent bows were also presented to the Pandavas. He also gave many beds, seats and utensils, all of which were made of gold. He also offered other material things and cattle. The number of all these separately was one crore. Thus, with great joy and happiness, Panchal King Drupada offered the above mentioned things to the Pandavas. He gave a hundred palanquins and five hundred porters to carry them. Thus, Panchal King gave all these things and a lot of money as dowry for his daughter. Janmejaya! Dhrishtadyumna himself took his sister by the hand and took her to sit on the carriage. At that time, thousands of types of musical instruments started playing simultaneously.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥