Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.d60-d65h: धृतराष्ट्र ने कहा - कुरुनन्दन! आपको राज्याभिषेक प्राप्त हुआ है, जो अमैथुनी पुरुषों को दुर्लभ है। राजन! आप राज्य पाकर संतुष्ट हैं। अतः आज ही खाण्डवप्रस्थ जाइए। श्रेष्ठ! पुरुरवा, आयु, नहुष और ययाति खाण्डवप्रस्थ में ही रहते थे। महाबाहु! वहाँ सभी पौरव राजाओं की राजधानी थी। कालान्तर में ऋषियों ने बुधपुत्र के लोभ से खाण्डवप्रस्थ को नष्ट कर दिया। अतः आप खाण्डवप्रस्थ नगरी को पुनः बसाइए और अपने राष्ट्र की उन्नति कीजिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी ने आपके साथ वहाँ जाने का निश्चय किया है। आपकी भक्ति के कारण अन्य लोग भी उस सुन्दर नगरी में आश्रय लेंगे। निष्पाप कुन्तीकुमार! वह नगर और राष्ट्र समृद्ध एवं धन-धान्य से परिपूर्ण है। अतः आप अपने भाइयों सहित वहाँ जाइए। | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र ने कहा - कुरुनन्दन! आपको राज्याभिषेक प्राप्त हुआ है, जो अमैथुनी पुरुषों को दुर्लभ है। राजन! आप राज्य पाकर संतुष्ट हैं। अतः आज ही खाण्डवप्रस्थ जाइए। श्रेष्ठ! पुरुरवा, आयु, नहुष और ययाति खाण्डवप्रस्थ में ही रहते थे। महाबाहु! वहाँ सभी पौरव राजाओं की राजधानी थी। कालान्तर में ऋषियों ने बुधपुत्र के लोभ से खाण्डवप्रस्थ को नष्ट कर दिया। अतः आप खाण्डवप्रस्थ नगरी को पुनः बसाइए और अपने राष्ट्र की उन्नति कीजिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी ने आपके साथ वहाँ जाने का निश्चय किया है। आपकी भक्ति के कारण अन्य लोग भी उस सुन्दर नगरी में आश्रय लेंगे। निष्पाप कुन्तीकुमार! वह नगर और राष्ट्र समृद्ध एवं धन-धान्य से परिपूर्ण है। अतः आप अपने भाइयों सहित वहाँ जाइए।
Dhritarashtra said – Kurunandan! You have received the coronation, which is rare for non-souled men. Rajan! You are satisfied after getting the kingdom. Therefore, go to Khandavprastha today itself. The best! Pururava, Ayu, Nahusha and Yayati lived in Khandavaprastha only. Great arms! There was the capital of all the Paurav kings. Later, the sages destroyed Khandavaprastha due to the greed of Budhaputra. Therefore, you re-establish the city of Khandavaprastha and progress your nation. Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras have all decided to go there with you. Because of your devotion, other people will also take shelter in that beautiful city. Sinless Kuntikumar! That city and nation are prosperous and full of wealth. So you go there along with your brothers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥