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mahabharat 1.206.d6: वैशम्पायन कहते हैं- ऐसा कहकर शोक से पीड़ित कुन्ती अत्यन्त चिन्तित होकर विलाप करने लगी। उस समय विदुर ने उन्हें प्रणाम करके कहा, आप शोक न करें।   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  1.206.d6 
वैशम्पायन उवाच
इत्येवमुक्ता दु:खार्ता शुशोच परमातुरा।
प्रणिपत्याब्रवीत् क्षत्ता मा शोच इति भारत॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- ऐसा कहकर शोक से पीड़ित कुन्ती अत्यन्त चिन्तित होकर विलाप करने लगी। उस समय विदुर ने उन्हें प्रणाम करके कहा, आप शोक न करें।
 
Vaishampayana says- Having said this, Kunti, afflicted with grief, became very anxious and started mourning. At that time Vidur bowed to her and said, do not mourn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)