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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  1.206.d46 
वैशम्पायन उवाच
भीष्मो द्रोण: कृप: क्षत्ता साधु साध्वित्यभाषत।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी ने कहा- जनमेजय! यह सुनकर भीष्म, द्रोण, कृपा और विदुर ने कहा- 'बहुत अच्छा! बहुत अच्छा!'
 
Vaishmpayana ji said- Janamejaya! On hearing this, Bhishma, Drona, Kripa and Vidura said- 'Very good! Very good!'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)