Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.d36-d45: (तब) धृतराष्ट्र ने (विदुर से) कहा- विदुर! तुम राज्याभिषेक की सामग्री लाओ, इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए। मैं आज ही कुरुकुलनन्दन युधिष्ठिर का अभिषेक करूँगा। वेदान्त विद्वानों में श्रेष्ठ ब्राह्मणों, नगर के सभी प्रमुख व्यापारियों, सामान्य लोगों और विशेषतः सम्बन्धियों को आमंत्रित किया जाना चाहिए। तात! धर्मयुक्त भाषण करो और ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित एक हजार गौएँ और प्रत्येक प्रमुख गाँव दान में दो। विदुर! दो बाजूबंद, एक सुंदर मुकुट और हाथ के आभूषण माँग लो। साथ ही बहुत सी मोतियों की मालाएँ, हार, पदक, कुण्डल, कमरबन्द, कमरसूत्र और पेटी भी ले आओ। एक हजार आठ हाथी माँग लो जिन पर ब्राह्मण सवार हों। वे हाथी शीघ्र ही पुरोहितों के साथ जाकर गंगाजल ले आओ। युधिष्ठिर अभिषेक के जल से भीगे हुए हों, वे समस्त आभूषणों से सुसज्जित हों, वे राजा की सवारी के योग्य हाथी पर बैठे हों, दिव्य पंखे उनकी ओर लहरा रहे हों और उनके सिर पर स्वर्ण और रत्नों से विभूषित श्वेत छत्र सुशोभित हो, अनेक राजा ब्राह्मणों के जयकारों के साथ उनकी स्तुति कर रहे हों। इस प्रकार नगर के लोग प्रसन्न मन से कुन्ती के ज्येष्ठ पुत्र और अजमीढ़ वंश के सदस्य युधिष्ठिर को देखकर प्रसन्न हों और उनकी खूब प्रशंसा करें। राजा पाण्डु ने मुझे राज्य देकर जो उपकार किया है, उसका बदला युधिष्ठिर को राजा बनाकर ही चुकाया जाएगा; इसमें संशय नहीं है। | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(तब) धृतराष्ट्र ने (विदुर से) कहा- विदुर! तुम राज्याभिषेक की सामग्री लाओ, इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए। मैं आज ही कुरुकुलनन्दन युधिष्ठिर का अभिषेक करूँगा। वेदान्त विद्वानों में श्रेष्ठ ब्राह्मणों, नगर के सभी प्रमुख व्यापारियों, सामान्य लोगों और विशेषतः सम्बन्धियों को आमंत्रित किया जाना चाहिए। तात! धर्मयुक्त भाषण करो और ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित एक हजार गौएँ और प्रत्येक प्रमुख गाँव दान में दो। विदुर! दो बाजूबंद, एक सुंदर मुकुट और हाथ के आभूषण माँग लो। साथ ही बहुत सी मोतियों की मालाएँ, हार, पदक, कुण्डल, कमरबन्द, कमरसूत्र और पेटी भी ले आओ। एक हजार आठ हाथी माँग लो जिन पर ब्राह्मण सवार हों। वे हाथी शीघ्र ही पुरोहितों के साथ जाकर गंगाजल ले आओ। युधिष्ठिर अभिषेक के जल से भीगे हुए हों, वे समस्त आभूषणों से सुसज्जित हों, वे राजा की सवारी के योग्य हाथी पर बैठे हों, दिव्य पंखे उनकी ओर लहरा रहे हों और उनके सिर पर स्वर्ण और रत्नों से विभूषित श्वेत छत्र सुशोभित हो, अनेक राजा ब्राह्मणों के जयकारों के साथ उनकी स्तुति कर रहे हों। इस प्रकार नगर के लोग प्रसन्न मन से कुन्ती के ज्येष्ठ पुत्र और अजमीढ़ वंश के सदस्य युधिष्ठिर को देखकर प्रसन्न हों और उनकी खूब प्रशंसा करें। राजा पाण्डु ने मुझे राज्य देकर जो उपकार किया है, उसका बदला युधिष्ठिर को राजा बनाकर ही चुकाया जाएगा; इसमें संशय नहीं है।
(Then) Dhritarashtra said (to Vidur) – Vidur! You bring the material for the coronation, there should be no delay in it. I will anoint Kurukulanandan Yudhishthira today itself. The best Brahmins among the Vedanta scholars, all the prominent traders of the city, people from the common people and especially the relatives should be invited. Tat! Make a virtuous speech and give a thousand cows and every major village to the Brahmins along with Dakshina. Vidur! Ask for two armlets, a beautiful crown and hand ornaments. Also bring many pearl beads, necklaces, medallions, earrings, waistband, waist thread and belly band. Ask for one thousand and eight elephants on which Brahmins ride. Those elephants should quickly go with the priests and bring the water of Ganga. Yudhishthira should be drenched in the water of Abhishek, he should be adorned with all the ornaments, he should be sitting on an elephant fit for a king's ride, divine fans should be waving at him and a white umbrella adorned with gold and gems should be decorated on his head, many kings should be praising him with the cheers of Brahmins. In this way, the people of the city should be pleased to see Yudhishthira, the eldest son of Kunti and a member of the Ajamidh clan, with a happy mind and should praise him profusely. The favour done by King Pandu by giving me his kingdom will be repaid only by crowning Yudhishthira as the king; there is no doubt about this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥