श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक d25-d26
 
 
श्लोक  1.206.d25-d26 
गान्धार्युवाच
कुन्तीं राजसुतां क्षत्त: सवधूं सपरिच्छदाम्।
पाण्डोर्निवेशनं शीघ्रं नीयतां यदि रोचते॥
करणेन मुहूर्तेन नक्षत्रेण शुभे तिथौ।
यथासुखं तथा कुन्ती रंस्यते स्वगृहे सुतै:॥
 
 
अनुवाद
तब गांधारी ने कहा- "विदुर! यदि आप चाहें तो राजकुमारी कुंती को उनकी पुत्रवधू सहित यथाशीघ्र पाण्डु के महल में ले जाइए और उनका सारा सामान भी वहीं भेज दीजिए। किसी शुभ तिथि, शुभ मुहूर्त और नक्षत्र सहित उस महल में उनका प्रवेश करा दीजिए, जिससे कुंतीदेवी अपने घर में अपने पुत्रों के साथ सुखपूर्वक रह सकें।"
 
Then Gandhari said- Vidur! If you like it, then take Princess Kunti along with her daughter-in-law to Pandu's palace as soon as possible and send all their belongings there too. They should enter that palace on an auspicious date with the best time, auspicious moment and constellation, so that Kuntidevi can live happily with her sons in her house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)