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mahabharat 1.206.9: भगवान् केशव जिस प्रकार पाण्डवों के हित का ध्यान रखते हैं, उतनी चिंता कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर भी नहीं रखते ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.206.9 
न तद् ध्यायति कौन्तेय: पाण्डुपुत्रो युधिष्ठिर:।
यथैषां पुरुषव्याघ्र: श्रेयो ध्यायति केशव:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भगवान् केशव जिस प्रकार पाण्डवों के हित का ध्यान रखते हैं, उतनी चिंता कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर भी नहीं रखते ॥9॥
 
The way the Supreme Personality of Godhead Keshav takes care of the welfare of the Pandavas, even Yudhishthira, the son of Kunti, does not take that much care. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)