Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.7-8: द्रुपद बोले - दशार्हवंश के रत्न महाबाहु और पराक्रमी श्रीकृष्ण इस समय जो कर्तव्य उचित समझते हैं, वही मेरा भी मत है। जैसे इस समय सौभाग्यशाली कुन्तीपुत्र मेरा अपना है, वैसे ही समस्त पाण्डव भगवान वासुदेव के समान रूप से प्रिय और निकट हैं - इसमें संशय नहीं है।॥7-8॥ | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रुपद बोले - दशार्हवंश के रत्न महाबाहु और पराक्रमी श्रीकृष्ण इस समय जो कर्तव्य उचित समझते हैं, वही मेरा भी मत है। जैसे इस समय सौभाग्यशाली कुन्तीपुत्र मेरा अपना है, वैसे ही समस्त पाण्डव भगवान वासुदेव के समान रूप से प्रिय और निकट हैं - इसमें संशय नहीं है।॥7-8॥
Drupada said - Whatever duty the mighty armed and valiant Shri Krishna, the gem of the Dasarha clan, thinks is right at this time, is certainly my opinion too. Just as the fortunate son of Kunti is my own at this time, in the same way all the Pandavas are equally dear and close to Lord Vasudeva - there is no doubt in this. ॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥