Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.206.6: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! तब वसुदेवपुत्र भगवान श्रीकृष्ण ने कहा - 'मेरी समझ में यही आता है कि वे चले जाएँ अथवा जो कुछ भी सब धर्मों के ज्ञाता महाराज द्रुपद उचित समझें, वही किया जाए।' ॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
ततोऽब्रवीद् वासुदेवो गमनं रोचते मम।
यथा वा मन्यते राजा द्रुपद: सर्वधर्मवित्॥ ६॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! तब वसुदेवपुत्र भगवान श्रीकृष्ण ने कहा - 'मेरी समझ में यही आता है कि वे चले जाएँ अथवा जो कुछ भी सब धर्मों के ज्ञाता महाराज द्रुपद उचित समझें, वही किया जाए।' ॥6॥
Vaishmpayana says - 'O Janamejaya! Then Lord Krishna, the son of Vasudeva, said - 'It seems to me that they should go away or whatever Maharaja Drupada, the knower of all religions, thinks is right, should be done.' ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥