श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.206.51 
पञ्चभिस्तैर्महेष्वासैरिन्द्रकल्पै: समन्वितम्।
शुशुभे तत् पुरश्रेष्ठं नागैर्भोगवती यथा॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वह महान इन्द्रप्रस्थ नगरी इन्द्र के समान बलवान और महान धनुर्धर पाँचों पाण्डवों के द्वारा सर्पों से परिपूर्ण भोगवतीपुरी के समान शोभायमान होने लगी ॥51॥
 
That great Indraprastha city started becoming beautiful like Bhogavatipuri full of snakes by the five Pandavas, who were powerful and great archers like Indra. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)