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mahabharat 1.206.5: युधिष्ठिर बोले, "हे राजन! हम सब अपने सेवकों सहित सदैव आपके अधीन हैं। आप हमें प्रसन्नतापूर्वक जो कुछ करने को कहेंगे, हम वही करेंगे।"   |   mahabharat अध्याय 1.206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 206: पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें आना और आधा राज्य पाकर इन्द्रप्रस्थ नगरका निर्माण करना एवं भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीका द्वारकाके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.206.5 
युधिष्ठिर उवाच
परवन्तो वयं राजंस्त्वयि सर्वे सहानुगा:।
यथा वक्ष्यसि न: प्रीत्या तत् करिष्यामहे वयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे राजन! हम सब अपने सेवकों सहित सदैव आपके अधीन हैं। आप हमें प्रसन्नतापूर्वक जो कुछ करने को कहेंगे, हम वही करेंगे।"
 
Yudhishthira said, "O King! We all, along with our servants, are always under your control. Whatever you tell us to do happily, we will do that."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)